कुछ और पोस्ट करना था, कुछ और कर रहा हूँ। इसका कारण छोटे मियां हैं जिनको गहरी नींद से उठाने के लिये मुझे तरह-तरह के गीत बजाने पड़े। उसी प्रक्रिया में इस गीत पर नज़र गई जो एक अरसे से मैंने नहीं सुना था।
कुछ दो-एक साल पहले आफ़िस में मेरे डेस्क पर अरुण दाते (Arun Date) की एक सीडी पड़ी थी। मेरे एक कर्नाटकी सहकर्मी ने वह सीडी उठाई और बोला, "ये अरुण डेट कौन है?" आप हँस सकते हैं मगर मुझे दुख हुआ। ऐसी है हमारी अनभिज्ञता। दुनिया के दूसरे छोर पर बैठे जार्ज माइकल के समलैंगिक सम्बंध तो हमारे अखबारों की सुर्खियां बन जाते हैं मगर अपने ही प्रादेशिक कलाकार हमारे लिए लगभग अनजान रहते हैं।
अरुण दाते मराठी कला जगत में बहुत बड़े हस्ताक्षर हैं। उनके गाए कुछ गीत और भावगीतों को सुनने का अवसर मुझे मिला है। अपने गायन से वे एक सहज संसार बुनते हैं जो उसी सहजता से सुनने वालों तक प्रेषित भी होता है। उनको सुनना, उनसे संवाद करने जैसा लगता है और आपको महसूस होगा कि आप एक हद तक उनके व्यक्तित्व को समझ भी पा रहे हैं।
इस गीत में उनका साथ लता जी ने दिया है। गीत गंगाधर महांबरे का है और संगीत प. हृदयनाथ मंगेशकर ने दिया है। अफ़सोस मेरे पास इस गीत का अनुवाद नहीं है। सभी मराठी भाषी भाईयों-बहनों से गुज़ारिश है यहां मेरी मदद करने की। गीत मैंने नीचे दे दिया है।
संधीकाली या अशा, धुंदल्या दिशा दिशा,
चांद येइ अंबरी चांदराती रम्य या,
संगती सखी प्रिया, प्रीत होइ बावरी
मुग्ध तू नि मुग्ध मी, अबोल गोड संभ्रमी, एकरूप संगमी
रातराणीच्यामुळे, श्वास धुंद परिमळे, फुलत प्रीतिची फुले
प्रणयगीत हे असे, कानि ऐकू येतसे, गीती शब्द ना जरी
सांजरंगी रंगुनी, न कळताच दंगुनी, हृदयतार छेडुनी
युगुलगीत गाउनी, एकरूप होउनी, देउ प्रीत दावुनी
प्रणायचित्र हे दिसे, रंगसंगती ठसे, कुंचला नसे जरी
