ऐसा बिरले ही होता है कि हम यहां पर एक ही कलाकार को छोटे अंतराल पर दोबार लाएं, मगर कैलाश खेर के लिये मैनें अपवाद रख छोड़ा है। वह इसलिये क्योंकि एक कलाकार को या एक तरह के संगीत को भी मैं लगातार ज़्यादा दिनों तक नहीं सुनता, मगर यहां भी अपवाद बन गया है।
पिछले महीने भर से मैं लगातार कैलाश के 10-12 गाने बार-बार सुन रहा हूँ और उनमें से भी दो गाने जो मुझे बेहद पसंद आए: पहला नैहरवा और दूसरा जो नीचे लगा रहा हूँ। नैहरवा मैनें कुछ समय पहले ही यहां लगाया था। यह गीत दरअसल दो-तीन लोकगीतों का घालमेल है और फ़्यूज़न होने के बावजूद मुझे बेहद अच्छा लगा।

