शनिवार, 20 दिसंबर 2008

चांन जैहे मुखड़े ते गिठ-गिठ लालियां

आसा सिंह मस्ताना को भले ही कई लोग नहीं जानते हों मगर इतना तय है कि जो गीत मेरे पास है उसे सबने कभी न कभी ज़रूर सुना होगा। अगर अपनी एक पूर्व-सहकर्मी को कोट करूं तो आसा सिंह "ब्लैक एंड वाइट गीत" गाने वाले गायक थे। मुझे तो उनकी आवाज़ कई बार रफ़ी साहब से मेल खाती भी लगती है। खैर, इसकी वजह यह है कि इनकी आवाज़ में भी वही मुलायमियत महसूस होती है जो रफ़ी साहब की आवाज़ में। 
पंजाब में संभवत: उनका रुतबा रफ़ी साहब वाला ही रहा हो। वे पंजाब के इतने घरेलू गायक थे कि शादी-ब्याह में भी गाने से गुरेज़ नहीं करते थे। इनके कुछ और गीत बाद में यहां लाने का विचार है। बहरहाल यह गीत सुनिये।



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4 टिप्पणियां:

विनय ने कहा…

पापे छा गये!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

जरूर उनके गीत सामने लाओ पाप्पे...हम तो उन्हीं को सुन सुन कर बढे हुए हैं...उनकी और सुरेंदर कौर जी की जोड़ी ने जो गीत पञ्जाबी को दिए हैं वो घर घर कभी बजा करते थे और आज भी री मिक्स की शक्ल में सुनाई देते हैं...आशा सिंह मस्ताना जी का गया " जदों मेरी अर्थी...." एक अमर गीत है...
नीरज

परमजीत बाली ने कहा…

आसा सिहँ मस्ताना पंजाबी के लोक प्रिय गायक थे।गीत सुन्वाने के लिए आभार।

एस. बी. सिंह ने कहा…

बहुत बढिया! आशा सिंह मस्ताना की जुगनी के अलावा यह भी मेरे प्रिय गीतों में है। सुनवाने का शुक्रिया

 

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