मंगलवार, 10 मई 2011

देवो मोहे धीर

मैं रोज़ रात को कुछ न कुछ संगीत सोने से पहले सुनता हूँ; खासतौर पर शास्त्रीय या उपशास्त्रीय संगीत. इसी सीरीज में आजकल पंडित कुमार गन्धर्व का गायन चल रहा है. यकीन जानिये अँधेरे कमरे में इस आवाज़ से दिव्य कुछ नहीं लगता.

ज़रा राग टोडी में इस बंदिश को सुनिए इस पावन स्वर में.






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यह सिलसिला अभी जारी रखने का इरादा है. अगर आलस ने साथ न दिया तो आपको कुछ और पंडित जी की आवाज़ में ज़रूर सुनाया जायेगा.
 

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... © 2010

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